मुक्तक : 284 - आलमे बेवफ़ाई में............


आलमे बेवफ़ाई में 
वफ़ा - वफ़ा लगता ॥
बददुआओं की भीड़ में 
दुआ – दुआ लगता ॥
ऐसा वो हो न हो 
लेकिन हाँ शक्लो-सूरत से ,
इक नज़र में तो आस्मानी - 
फ़रिश्ता लगता ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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