मुक्तक : 283 - वांछित थे उपन्यास..........


वांछित थे उपन्यास – वृहद 
किन्तु मिलीं गल्प ॥
अत्यंत के भिक्षुक थे पाया 
न्यूनतम - अत्यल्प ॥
ये भाग्य – दोष था कि 
किए यत्न जिस लिए ,
उसके उचित स्थान पे 
प्रायः मिले विकल्प ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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