मुक्तक : 282 - अभी धोखा नहीं.........


अभी धोखा नहीं खाया 
अभी मातम से खाली है ॥
ग़ज़ल कहना तो है लेकिन 
अभी दिल ग़म से खाली है ॥
खड़ा कर दे जो बहरों के भी 
कानों को वो कहना है ,
मगर आवाज़ अभी मेरी ये 
उस दमख़म से खाली है ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति  

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बहुत उम्दा ... लाजवाब मुक्तक ...
धन्यवाद ! दिगंबर नासवा जी !

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