मुक्तक : 281 - दिल में कितनी..........


दिल में कितनी थी तमन्नाएँ सब्ज़ो-लाल मगर ॥
रह गईं होते - होते पूरी बाल - बाल मगर ॥
कुछ ख़तावार हम थे कुछ थी हमारी क़िस्मत ,
चाहते थे उड़ें आज़ाद मिले जाल मगर ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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