मुक्तक : 278 - राहों में कितनी.................

राहों में कितनी कितनी बार मिल चुका खड़ा ॥
करने को मुझसे ज़िद पे कई मुद्दतों अड़ा ॥
पैवस्त था डर दिल में इतना बेवफ़ाई का ,
मैं इसलिए इस इश्क़ के पचड़े में न पड़ा ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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