मुक्तक : 276 - कुछ नहीं अफ़्सोस........

कुछ नहीं अफ़्सोस गर वो तुच्छ है नाचीज़ है ॥
वो मेरा है मुझको अपनी जान से भी अज़ीज़ है ॥
प्यार से सींचूँ उसे सच तह-ए-दिल से खाद दूँ ,
जानता हूँ ख़ूब वो कच्चा औ’’ पोला बीज है ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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