मुक्तक : 275 - तेरा हर इक.............


तेरा हर इक हुक़्म हँस-हँस 
कर बजा डालेंगे हम ॥
तेरे पीछे-पीछे आँखें 
बंद कर भागेंगे हम ॥
लीक पर ढर्रे पे तो 
सारा ज़माना चल रहा ,
कुछ नया कर के दिखा दे 
तो तुझे मानेंगे हम ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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