*मुक्त-मुक्तक : 272 - रात दिन कर..............


 रात दिन कर तू वफ़ा सिर्फ़ वफ़ा की बातें ॥
मत डरा यार कर फ़रेबो दग़ा की बातें ॥
हो गई मुझसे जो गफ़्लत-ए-इश्क़ कर मुझसे ,
छोड़ ग़म दर्द की बस लुत्फ़ो-मज़ा की बातें ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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