*मुक्त-मुक्तक : 271 - सँकरी गली में..............

सँकरी गली में लंबी-चौड़ी कार न चला ॥
चाकू से काट केक को तलवार न चला ॥
बादल हैं तेरे पास तो सूखे में फाड़ उन्हे ,
लबरेज़ कुओं नदियों में बौछार न चला ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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