*मुक्त-मुक्तक : 267 - जिसने कि ख़ुद..........


जिसने कि ख़ुद ही मुझको 
गुनहगार किया है ॥
हैरान हूँ उसी ने 
गिरफ़्तार किया है !
जानूँ न क्यों डुबो रहा है
 सूखी नहर में ,
नदियों से गहरी-गहरी 
जबकि पार किया है ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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