*मुक्त-मुक्तक : 266 - मिलते न ले............


मिलते न ले चिराग़ भी ढूँढे से वफ़ादार ॥
अंधों से भी टकराएँ मगर ढूँढ के ग़द्दार ॥
ये कैसा ज़माना है कि रखते तो सब हैं दिल ,
लेकिन नहीं मिलते हैं दिलनवाज़ न दिलदार ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Yash Babu said…
.

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वहा सा .. आनंद दायक ..

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