*मुक्त-मुक्तक : 265 - मत सिर्फ़ ख़्वाब..........


मत सिर्फ़ ख़्वाब देख 
न केवल विचार कर ॥
करना है जो भी तुझको 
फ़क़त आर-पार कर ॥
बेशक़ तू सादगी का 
पहन कर के जामा चल ,
बस बैलगाड़ी चाल छोड़ 
खुद को कार कर ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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