*मुक्त-मुक्तक : 262 - इक बार यकायक...........

इक बार यकायक मज़ाक अजीब कर दिया ॥
किस्मत ने यों अमीर को गरीब कर दिया ॥
हासिल था कोहेनूर के सब दिल पे जिसका हक़ ,
इक ताज को उसका अदू , रक़ीब कर दिया ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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