*मुक्त-मुक्तक : 260 - चाय भी नाश्ता भी.........


चाय भी नाश्ता भी 
साथ-साथ खाना भी ॥
उसको बख़्शीश भी 
भरपूर मेहनताना भी ॥
उससे बेहतर हूँ मगर 
वाहवाही उसको मिले ,
मुझको सूखी पगार 
डांट-डपट-ताना भी ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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