*मुक्त-मुक्तक : 259 - कोई पढ़ता नहीं...............


कोई पढ़ता नहीं है 
यूँ ही लिखे जाता हूँ ॥
कोई तकता नहीं मैं 
फिर भी दिखे जाता हूँ ॥
कितने ही काम मेरी 
लत हैं मेरी आदत हैं ,
जैसे मरना है मगर 
यूँ ही जिये जाता हूँ ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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