मुक्तक : 263 - न हरिश्चंद्र न............


न हरिश्चंद्र न सुकरात मुझे बनना है ॥
आत्मघाती न हो उतना ही सच उगलना है ॥
फूट जाये न कहीं सर ये छत से टकराकर ,
बंद कमरों में एहतियात से उछलना है ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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