*मुक्त-मुक्तक : 258 - ये उसी की रज़ा.............


ये उसी की रज़ा थी 
इतना क़ामयाब हुआ ॥
सब उसी की दुआ से 
मुझको दस्तयाब हुआ ॥
क्यों मुनादी न करूँ 
जबकि कम ही कोशिश में ,
जिसकी उम्मीद न थी 
सच वो मेरा ख़्वाब हुआ ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Neeraj Kumar said…
बहुत खूब ।
बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा आज सोमवार (01-07-2013) को प्रभु सुन लो गुज़ारिश : चर्चा मंच 1293 में "मयंक का कोना" पर भी है!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
आपका बहुत बहुत धन्यवाद ! डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री जी !

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