*मुक्त-मुक्तक : 257 - अतिशय विनम्र..............


अतिशय विनम्र था तनिक 
अशिष्ट हो गया ॥
पाकर के उनका प्रेम 
बहुत धृष्ट हो गया ॥
मित्रों में मेरी पूछ-परख 
पहले नहीं थी ,
अब शत्रुओं में भी मैं 
अति-विशिष्ट हो गया ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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