*मुक्त-मुक्तक : 256 - बात सारी दिल.............


बात सारी दिल की दिल में 
रख न बाहिर कर ॥
दोस्तों में भी कमी 
अपनी न जाहिर कर ॥
नीम रख दिल में मगर 
होठों पे रसगुल्ले ,
काम तो कर बात में भी
 ख़ुद को माहिर कर ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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बहुत ही सुन्दर प्रस्तुती आभार ।
धन्यवाद ! राजेन्द्र कुमार जी !

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