*मुक्त-मुक्तक : 255 - तलाशे वफ़ा में.................


तलाशे वफ़ा में जो 
हम घर से निकले ॥
हवेली महल झोपड़ी 
देखे किल्ले ॥
वफ़ा आश्नाई में 
इंसाँ से ज़्यादा ,
लगे आगे सच सारे 
कुत्तों के पिल्ले ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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