*मुक्त-मुक्तक : 254 - उसमें भरपूर.............


उसमें भरपूर जवानी में भी 
ग़ज़ब बचपन ॥
बाद शादी के भी पैवस्त 
धुर कुंवारापन ॥
उसकी चख़चख़ ग़ज़ल है 
चीख़ कुहुक कोयल की ,
बाद सालों के भी 
लगती है अभी की दुल्हन ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Popular posts from this blog

विवाह अभिनंदन पत्र

विवाह आभार पत्र

मुक्त ग़ज़ल : 267 - तोप से बंदूक