*मुक्त-मुक्तक : 253 - अरमान धराशायी..........


अरमान धराशायी 
हो जाएँ चाहे सारे ॥
मझधार निगल जाये
 नैया सहित किनारे ॥
फंदा गले में अपने 
हाथों से न डालूँगा ,
तब तक जिऊंगा जब तक
 ख़ुद मौत आ न मारे ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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