*मुक्त-मुक्तक : 252 - सब हुए अत्याधुनिक.......


सब हुए अत्याधुनिक तू 
अब भी दकियानूस क्यों ?
सबकी चालें हिरणो चीती 
तेरी अब भी मूस क्यों ?
न सही अंदर से ऊपर 
से तो दिख शहरी यहाँ ,
सब हैं अप-टू-डेट इक 
तू ही मिसाले हूश क्यों ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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बहुत ही सुन्दर और सार्थक मुक्तक,आभार.
धन्यवाद ! राजेन्द्र कुमार जी !

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