*मुक्त-मुक्तक : 251 - क्यों दूर की.............


क्यों दूर की बुलंदी
दिखती खाई पास से ॥
क्यों क़हक़हों से बाँस 
सुबकते हैं घास से ॥
क्या यक-ब-यक हुआ कि
 तमन्नाई खुशी के ,
मिलते ही खुशी हो रहे 
उदास उदास से ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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