*मुक्त-मुक्तक : 250 - सीधी नहीं.................


सीधी नहीं मुझे प्रायः 
विपरीत दिशा भाये ॥
मैं चमगादड़ नहीं किन्तु सच 
अमा निशा भाये ॥
क्यों संतुष्ट तृप्त अपने 
परिवेश परिस्थिति से ?
मुझको कदाचित नीर मध्य 
मृगमार तृषा भाये ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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