*मुक्त-मुक्तक : 244 - अंधों को है...........


अंधों को है गुलजार के 
दीदार का हुकुम ॥
गूँगों के लिए भौंरों सी 
गुंजार का हुकुम ॥
ये उल्टे हुक्मराँ जो 
ठग लुटेरे न्योतते ,
देते हैं निगेहबाँ को 
तड़ीपार का हुकुम ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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