*मुक्त-मुक्तक : 239 - पेड़ पे लटका.............


पेड़ पे लटका आम 
लगता टपका-टपका सा ॥
आँख फाड़े हुए 
जागूँ मैं झपका-झपका सा ॥
हर्ष-उत्साह से 
अनभिज्ञ निरंतर निश्चित ,
मृत्यु की ओर 
बढ़ रहा हूँ लपका-लपका सा ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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