*मुक्त-मुक्तक : 240 - पढ़ता नहीं कोई..........


पढ़ता नहीं कोई तो भला 
क्यों लिखे कोई ?
अंधे के लिए बन सँवर के
 क्यों रहे कोई ?
होता ज़रूर होगा कुछ तो 
फ़ायदा वरना ,
सुनता न कोई फिर भी अपनी 
क्यों कहे कोई ?
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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