*मुक्त-मुक्तक : 233 - हुस्न में वो............


हुस्न में वो पुर ग़ज़ब 
इंसान था ॥
उसका रब जैसा ही कुछ 
उनवान था ॥
शक्लोसूरत से तो
 मीठी झील था ,
फ़ितरतोसीरत से 
रेगिस्तान था ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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