*मुक्त-मुक्तक : 232 - आज कच्चे ही.............


आज कच्चे ही सभी 
पकने लगे हैं ॥
इसलिए जल्दी ही सब 
थकने लगे हैं ॥
अपने छोटे छोटे 
कामों को भी छोटे-
छोटे भी नौकर 
बड़े रखने लगे हैं ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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