*मुक्त-मुक्तक : 231 - उम्र भर खाली..........


उम्र भर खाली रहा जो 
वक़्ते रुख़सत भर गया ॥
इक वो हैरतनाक उम्दा 
कारनामा कर गया ॥
जिससे बढ़कर दूसरा 
दुनिया में न खुदगर्ज़ था ,
बस जुनूँ में इक परायी 
जाँ बचाते मर गया ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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