*मुक्त-मुक्तक : 229 - दुपट्टे बिन न..............


दुपट्टे बिन न आगे ब्रह्मचारी
 के तू आया कर ॥
विधुर के सामने यौवन को मत 
खुलकर दिखाया कर ॥
तू निःसन्देह सुंदर है , 
है आकर्षक बड़ी पर स्थिर-
तलावों में न यों बारूद के
 गोले गिराया कर ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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