*मुक्त-मुक्तक : 228 - मेघ की रोज़..........


मेघ की रोज़ मरुस्थल 
पुकार करता है ॥
किन्तु मेघ अपना जल 
नदी पे वार करता है ॥
मैंने पाया है जिनके पास 
प्रचुर धन-दौलत ,
उनपे चित लक्ष्मी , 
कुबेर प्यार करता है ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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