*मुक्त-मुक्तक : 224 - कुछ निष्ठा कुछ.........


कुछ निष्ठा कुछ अथक परिश्रम
 पर आधृत पायीं ॥
कुछ बातें संयोग मात्र कुछ
 भाग्याश्रित पायीं ॥
गाह बिल्लियों के भागों 
ख़ुद छींके टूट गिरे ,
और कभी मुश्किल से 
चूहे कर अर्जित पायीं ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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