*मुक्त-मुक्तक : 223 - बछड़े के लिए..........

बछड़े के लिए कुछ तो दूध छोड़ दे कट्टर ॥
कितना दुहेगा रहम भी कर गाय के थन पर ॥
बिन दाँत के बछड़े को परोसे अभी से घास ,
दम है तो अपने दुधमुंहे के आगे रोटी धर ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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