*मुक्त-मुक्तक : 221 - पहले के ज़माने...........


पहले के ज़माने में तो 
घर घर थे कबूतर ॥
इंसानी डाकिये से भी 
बेहतर थे कबूतर ॥
इस दौर में वो ख़त-ओ-
किताबत नहीं रही ,
सब आशिक़ों पे ज़ाती 
नामावर थे कबूतर ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 






       
 

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