*मुक्त-मुक्तक : 219 - हारा नहीं हूँ.....................


हारा नहीं हूँ चलते चलते थोड़ा रुक गया ॥
सुस्ता रहा हूँ ये न समझना कि चुक गया ॥
हैं बेक़रार मुझको तोड़ने जब आँधियाँ ,
मैं भी सलामती को अपनी थोड़ा झुक गया ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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