*मुक्त-मुक्तक : 218 - वो यक़ीनन नहीं.............

वो यक़ीनन नहीं दुश्मन वो यार होता है ॥
ऐसे चढ़कर के जो गर्दन सवार होता है ॥
आजकल इतनी बेतकल्लुफ़ी कहाँ दिखती ,
दोस्तों में न अबके इतना प्यार होता है ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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