*मुक्त-मुक्तक : 216 - न इक़दम ही नई...........

न इकदम ही नई है और न बेहद ही पुरानी है ॥
किसी से क्या कहलवाएँ ख़ुद अपने मुँहज़बानी है ॥
बहुत मुश्किल से पाई और आसानी से जो खो दी ,
लम्हा भर की मोहब्बत की सदियों लंबी कहानी है ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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