*मुक्त-मुक्तक : 214 - अमावस को भी............


अमावस को भी मैं पूनम की 
उजली रात लिखता हूँ ॥
जो तोड़े न किसी का दिल 
मैं ऐसी बात लिखता हूँ ॥
समंदर के किनारे दूर तक 
मैं फैली रेती पर ,
हमेशा ही तुम्हारा नाम 
अपने साथ लिखता हूँ ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति


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