*मुक्त-मुक्तक : 213 - आहिस्ता-आहिस्ता औरत......



आहिस्ता-आहिस्ता औरत निकलेगी पर्दों से ॥
उस दिन आगे-आगे होगी आगे के मर्दों से ॥
आजिज़ आ ठानेगी जिस दिन छुटकारा पाने की ,
जुल्म-सितम से , बंदिश से , लाचारी से , दर्दों से ॥ 
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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