*मुक्त-मुक्तक : 212 - घर बैठे...............

घर बैठे मुफ़्त की मैं रोटी न चबाती हूँ ॥
भर पाऊँ पेट अपना इतना तो कमाती हूँ ॥
हूँ एम. ए. पास फ़िर भी संकोच नहीं करती ,
रिक्शा चला चला कर मैं घर को चलाती हूँ ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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