*मुक्त-मुक्तक : 210 - हो गए घर घर..............

हो गए घर घर पलंग खटिया पुरानी पड़ गई ॥
जबसे छत ढलने लगे टटिया पुरानी पड़ गई ॥
समय ने नख शिख बदल डाले सकल परिदृश्य के ,
केश लहराने लगे चुटिया पुरानी पड़ गई ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Rajendra Kumar said…
चुटिया पुरानी पड़ गयी,बहुत ही सुन्दर.
धन्यवाद ! Rajendra Kumar जी !

Popular posts from this blog

विवाह अभिनंदन पत्र

विवाह आभार पत्र

सिर काटेंगे