*मुक्त-मुक्तक : 209 - बेमज़ा सब................


बेमज़ा सब 
इश्क़बाजी हो गई ॥
क्यों वो झटपट 
मुझसे राजी हो गई ॥
तैरना था मुझको
 पर तूफाँ से वो ,
किस्ती , साहिल 
और माझी हो गई ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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