*मुक्त-मुक्तक : 208 - इक हिरनी के...............

इक हिरनी के पीछे कैसे लगे भेड़िये ?
नहीं देखने लायक मंजर मगर देखिये ॥
गर चाहो दोबारा ये सब नहीं घटे फ़िर ,
पकड़ के इन बदमाशों की गरदनें रेतिये ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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