*मुक्त-मुक्तक : 205 - कोई शेर कहे..........

कोई शेर कहे कोई मगर मच्छ कोई भेड़ कहे ॥
कोई एक कहे कोई ढाई कहे कोई डेढ़ कहे ॥
कुछ और नहीं सच इसके सिवा है इश्क़ ख़ुदा ,
यह प्रेम प्रतीक लगाए हिये चुप पेड़ कहे ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Anonymous said…
वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह........... बहुत खुब......
बहुत बहुत धन्यवाद ! mohit punpher जी !

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