*मुक्त-मुक्तक : 204 - ठाठ से शाही...............

ठाठ से शाही पलंग के नर्म गद्दों पर ॥
लोग करवट ही बदलते रहते है शब भर ॥
नींद आ जाए तो बिस्तर कौन तकता है ,
मैं तो खर्राटे लगाऊँ पेड़ पर चढ़कर ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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