*मुक्त-मुक्तक : 202 - चाँद पे चढ़............


चाँद पे चढ़के 
समंदर में 
कूद पड़ जाऊँ ॥
कहके तो देखो
 मैं सूरज को भी 
बुझा आऊँ ॥
अपने दिल में जो
 बसाने का 
मुझसे वादा करो ,
ग़ैर मुमकिन को भी
 मुमकिन 
बनाके दिखलाऊँ ॥
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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