*मुक्त-मुक्तक : 200 - निहायत भौंडी.................


निहायत  भौंडी सूरत वाला 
सुंदरलाल लिखता है ॥
हमेशा हारने वाला 
सिकंदरलाल लिखता है ॥
यहाँ की रीत है शैताँ लिखे 
ख़ुद को मसीहा ,
भिखारी अपना असली नाम 
गब्बरलाल लिखता है ॥
(गब्बर=बहुमूल्य,घमंडी,धनी)
-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

Comments

Deepak Pareek said…
सुन्दर
धन्यवाद ! Deepak Pareek जी !

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