*मुक्त-मुक्तक : 199 - हादसा ऐसा ये............


हादसा ऐसा ये मेरे 
साथ कैसे घट गया ?
जिसको सोचा था न सोचूँ 
मुझको वो ही रट गया !
जिससे चिढ़ थी दुश्मने जाँ 
जिसको दिल कहता रहा ,
उससे ही मैं आज जाकर 
छटपटाकर सट गया !
-डॉ. हीरालाल प्रजापति


Comments

Rajendra Kumar said…
बहुत ही सुन्दर....आभार.
धन्यवाद ! Rajendra Kumar जी !
shishir kumar said…
Avibyakti ke liye Dhanyabad
धन्यवाद ! shishir kumar जी !

Popular posts from this blog

मुक्त-ग़ज़ल : 262 - पागल सरीखा

विवाह अभिनंदन पत्र

मुक्त-ग़ज़ल : 264 - पेचोख़म